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Quotes Of The Day

"Quotes Of The Day..."

"A person should not be too honest. Straight trees are cut first and honest people are hooked  first."

-  Chanakya quotes(Indian politician, strategist and writer, 350 BC-275 BC)

Monday, May 28, 2012

राजस्थान के प्रमुख एतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलR


राजस्थान के प्रमुख एतिहासिक एवं दर्शनीय स्थल


  • हवामहल – जयपुर
  • जंतर मंतर - जयपुर
  • गलता जी – जयपुर
  • जसवंत थड़ा – जोधपुर
  • पटवों की हवेली – जैसलमेर
  • सालिम सिंह की हवेली – जैसलमेर
  • रामगढ़ की हवेलियां – जैसलमेर
  • नथमल की हवेली – जैसलमेर
  • चौरासी खंभों की छतरी – बूँदी
  • रानी जी की बावड़ी – बूँदी
  • क्षार बाग की छतरियाँ – बूँदी
  • स्वर्ण या सुनहरी कोठी – टौंक
  • विजय स्तम्भ – चित्तौड़
  • कीर्ति स्तम्भ – चित्तौड़
  • सर्य मंदिर – झालावाड़
  • ढाई दिन का झोंपड़ा – अजमेर
  • जल महल – जयपुर, डीग व उदयपुर
  • अरथूना के प्राचीन मंदिर - बाँसवाड़ा
  • भांडासर जैन मंदिर – बीकानेर
  • गैप सागर – डूंगरपुर
  • बिड़ला तारामंडल – जयपुर
  • कोलवी की गुफाएँ – झालावाड़
  • उम्मेद भवन – जोधपुर
  • मंडोर – जोधपुर
  • भंड देवरा मंदिर – कोटा
  • सज्जनगढ़ – उदयपुर
  • आहड़ संग्रहालय – उदयपुर
  • हर्ष मंदिर - सीकर
  • द्वारकाधीश मंदिर - कांकरोली राजसमंद
  • आभानेरी मंदिर - दौसा
  • सच्चिया माता मंदिर - ओसियां जोधपुर
  • रानी पद्मनी महल - चित्तौड़गढ़
  • सहेलियों की बाड़ी - उदयपुर
  • कुंभलगढ़ - केलवाड़ा राजसमंद
  • ब्रह्मा मंदिर – पुष्कर
  • देव सोमनाथ मंदिर- डूंगरपुर
  • फखरुद्दीन की दरगाह - गलियाकोट, डूंगरपुर
  • आमेर किला - आमेर, जयपुर
  • रणकपुर जैन मंदिर - सादड़ी, पाली
  • सांवलिया जी मंदिर - मंडफिया, चित्तौड़गढ़
  • सास-बहू के प्राचीन मंदिर ( प्राचीन नागदा राज्य के मंदिर) - कैलाशपुरी, उदयपुर
  • जगत के प्राचीन मंदिर - जगत गाँव उदयपुर
  • श्रीनाथजी मंदिर - नाथद्वारा, राजसमंद
  • मीरा बाई का मंदिर - मेड़तासिटी, नागौर
  • बाबा रामदेव मंदिर - पोकरण के पास रामदेवरा, जैसलमेर
  • नाकोड़ा पार्श्वनाथ मंदिर - बालोत्तरा के पास, जिला बाड़मेर
  • दिलवाड़ा जैन मंदिर - माउंट आबू
  • सालासर बालाजी - सालासर, चुरू
  • खाटू श्यामजी - खाटू गाँव सीकर
  • सोनीजी की नसियाँ - अजमेर

RAJASTHAN 3rd GRADE TEACHERS EXAM Admit Card


RAJASTHAN 3rd GRADE TEACHERS EXAM Admit Card

Thursday, May 17, 2012

इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!......बनी-ठनी




...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!
राजस्थान, जो अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में शुमार है,जहां एक ओर दूर तक फैला हुआ थार का रेगिस्तान है तो दूसरी ओर राजपूत राजा-महाराजाओं के गौरवपूर्ण इतिहास की गाथा गाते हुए ऊंचे-ऊंचे महल हैं|जहां की कला संस्कृति सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक अलग छाप लिए हुए है|











पूरे विश्व में अपना परचम फहराने वाली इन्ही कलाओं में से एक कला हैं यहां की लघु चित्रकारी|जिसकी शुरुआत मुगलों के द्वारा की गई थी| इस कला को फराज (पार्शिया) से लाया गया था| हुमायु ने फ़राज़ से चित्रकारों को बुलाया था, बाद में अकबर ने इसे बढ़ावा देने के लिए एक शिल्प कला का निर्माण करवाया था| फ़राज़ के कलाकारों ने इस भारतीय कलाकारों को इस कला का प्रशिक्षण दिया, बाद में इस खास शैली में तैयार किये गए चित्र राजस्थानी चित्र या राजपूत चित्र कहलाए|

...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!

बनी-ठनी 
...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!


 अठारहवीं सदी में राजस्थान के किशनगढ़ प्रान्त में एक नई कला ने जन्म लिया जिसे आज भी बनी ठनी के नाम से जाना जाता है|


...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!


इस कला का जन्म महाराजा सावंत सिंह के शासन काल में हुआ था| 

...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!


कहा जाता है कि महाराजा सावंत सिंह को बनी ठनी नामक एक दासी से प्रेम हो गया था, तब उन्होंने उस समय के कलाकारों को आदेश दिया कि वे कृष्ण-राधा के प्रेम चित्रों के रूप में उनकी और उनकी प्रेमिका की तस्वीरें बनाएं| 




...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!

बाद में यह चित्रकारी इतनी प्रसिद्ध हो गई कि इसे भारत की मोनालिसा के नाम से जाना जाने लगा|



...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम! ...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!

...और इस तरह अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!


आज भी देश-विदेश में बनी ठनी का एक अलग ही मुकाम है|


जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना!





                     
जोधपुर.शहर से महज 30-40 किलोमीटर दूर स्थित तीन गांवों की जमीन डेढ़ से दो हजार वर्ष पुरानी सभ्यता के निशान उगल रही है। प्राचीन सभ्यता के प्रमाण धीरे-धीरे जमीन से बाहर निकल रहे हैं। इनमें जैन र्तीथकरों की मूर्तियां, शिलालेख, नर्तकियों की प्रतिमाएं, शिवलिंग, नक्काशीदार लेख, मंदिर व बावड़ी आदि से संबंधित पुरा संपदा शामिल है।


पड़ताल में बावरली, तोलासर और लोरडी गांव में प्राचीन सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। ये तीनों गांव 15 किलोमीटर के दायरे में हैं। यहां आस-पास 200 किलोमीटर के दायरे में पुरा संपदा के भंडार दबे होने की संभावना है।
तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ानातस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना

तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना


                                                                                       
                               

चौंकाने वाली बात यह है कि हजारों साल पुरानी संपदा वीरानी में बर्बाद हो रही है। गांव में नाडी के किनारे जैसे-जैसे पानी कम हुआ तो जमीन से ये अवशेष बाहर निकलने लगे। भास्कर टीम ने कंटीली झाड़ियों, तालाब के नीचे मिट्टी से झांकते ये अवशेष देखे। पुरातत्व विभाग के अधीक्षक ने जब अवशेष के फोटो देखे तो वे दंग रह गए।

पहले भी मिले थे अवशेष
तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना

पड़ताल में पता चला कि इसी बेल्ट में आगोलाई में करीब ढाई दशक पहले नाडी की खुदाई के दौरान शेष साई विष्णु की विशाल मूर्ति मिली थी। वर्ष 2004 में घंटियाला गांव में कीर्ति स्तंभ व सर्वतोभद्र गणोश की प्राचीन मूर्तियां मिली थी। इसके अलावा एक मंदिर के अवशेष भी मिले थे।

700 साल पुराने गांव

ग्रामीणों की मानें तो यहां के गांव करीब 700 साल पहले बसे थे, जबकि प्राचीन अवशेष डेढ़ से दो हजार साल पुराने हैं। लोरडी , तोलेसर व आगोलाई से एक नदी निकलती थी। पुरातत्व विभाग के अधीक्षक वीरेंद्र कविया भी मानते हैं कि नदी में बाढ़ आने से ही प्राचीन सभ्यता नष्ट हो गई थी। उसी के निशान अब बाहर निकलने लगे हैं।

निशान मिलने के कारण

पुरा विशेषज्ञों की मानें तो जोधपुर के निकटवर्ती गांवों में पुरा संपदा का भंडार है। इसके कुछ खास कारण है। वीरेंद्र कविया का कहना है कि गांव के समीप नदी होने व बाढ़ आने से प्राचीन सभ्यता के निशान बह गए थे, जो अब बाहर निकल रहे हैं। दूसरा कारण मुगल काल के दौरान मूर्तियों व मंदिरों को नष्ट किया जा रहा था। ऐसे में उन्हें बचाने के लिए नाडियों व तालाबों में छिपाया गया। पानी सूखने व रेत हटने से वही मूर्तियां बाहर आने लगी हैं। एक कारण यह भी है कि प्राचीन काल में अग्निकांड में भी गांव व मूर्तियां तबाह हुई थीं।

चित्रलिपि है या कुछ और
तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना
इन निशानियों में चित्रलिपि जैसा प्रतीक भी मिला है। पुरा विशेषज्ञों का कहना है कि यह चित्रलिपि दो हजार साल पहले पाई जाती थी। बाद में ब्राह्मीलिपि प्रचलन में आई। इसके बारे में रोचक बात यह भी बताई जा रही है कि यह प्राचीन समय में खजाना खोजने के दौरान काम में लिए जाने वाले संकेत भी हो सकते हैं।

तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना

दो हजार साल पुराने सिक्के मिले

शोध करने वाले सूर्यवीरसिंह ने बताया कि दो माह पहले लोरड़ी गांव में मकानों की खुदाई के दौरान हजारों साल पुराने सिक्के मिले हैं। इनमें करीब दो हजार साल पुराने तांबे के सिक्के भी हैं। गांव के लोगों का कहना है कि दो लोगों के मकान से कुछ सिक्के मिले थे। एक युवक ने सिक्का भी दिखाया। यह काफी पुराना लग रहा है।

बुद्ध प्रतिमा का भी दावा
तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना
'मैं पांच साल से इन क्षेत्रों में रिसर्च कर रहा हूं। इस दौरान पाया कि हजारों साल पुरानी सभ्यता की निशानियां यहां छिपी हैं। यहां के 200 किलोमीटर दायरे में जमीन में पुरा संपदा दबी पड़ी है। इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए।'

तस्वीरों में देखें: जोधपुर में ज़मीन ने उगला दो हजार साल पुरानी सभ्यता का खज़ाना
सूर्यवीर सिंह राजपुरोहित, युवा शोधार्थी

डेढ़-दो हजार साल पुरानी सभ्यता है

'शिलालेख, मूर्तियों, तालाब व सीढ़ियों के निशान देखने से लगता है कि यहां कम से कम डेढ़ से दो हजार साल पुरानी सभ्यता के निशान दबे हैं। विभाग इन क्षेत्रों का सर्वे कराएगा और पता लगाएगा कि कितनी पुरा संपदा है, ताकि इन्हें सहेज कर रखा जा सके।'

वीरेंद्र कविया, अधीक्षक, पुरातत्व विभाग जोधपुर

सरकार को संरक्षण करना चाहिए

'जोधपुर के आस-पास के गांवों में प्राचीन सभ्यता के भंडार दबे हैं। इंटेक ने कई जगह शोध किए हैं। इसमें खुलासा हुआ है। सरकार को पुरा संपदा को सहेजने के लिए योजना बनानी होगी, वरना यह खजाना यूं ही धूल चाटता रहेगा।'

महेंद्रसिंह नगर, संयोजक, जोधपुर चैप्टर इंटेक